MOTHERS DAY: मिलिए बॉलीवुड की इन दुखियारी मांओं से, जिन्होंने फिल्मों में खूब बहाई गंगा-जमुना

New Delhi: मेरे बेटे आयेंगे, मेरे करण अर्जुन आयेंगे … जमीन की छाती फाड़ के आएंगे। आसमान का सीना चीर के आएंगे। तुम्हारा सर्वनाश करने आएंगे। ये फिल्म करण-अर्जुन का एक ऐसा डायलॉग है जो याद भी याद किया जाता है। इस फिल्म में अपने बेटों के पुनर्जन्म के इंतजार में एक मां ने रोते हुए जिंदगी निकाल दी।  आज हम आपको बॉलीवुड की कुछ ऐसी ही मम्मियों के बारे में बताएंगे जिन्हें The Queen Of misery कहा जाता है। यानी दुखों की रानी।

12 मई को Mothers Day है। तो चलिए Mothers Day पर आपको  दुखियारी मम्मियों  से मिलवाते हैं। बॉलीवुड की इन मम्मियों ने फिल्मों में खूब गंगा-जमुना बहाई है।

Nirupa Roy – 

मेरे पास मां है। इस डायलॉग में मां की भूमिका में Nirupa Roy  थीं।  Nirupa Roy को दुखों की रानी कहते हैं। इन्होंने फिल्मों में खूब आंसू बहाए हैं। इतने आंसू बहाए हैं कि जो भी फिल्म देखता रो पड़ता।  1970 में हिंदी फिल्मों में मां की भूमिका निभानी शुरू की थी। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के मां की भूमिका निभा चुकी हैं। गरीब दुखियारी मां का शानदार किरदार निभाया है। फिल्म दीवार में मुझे खरीदने की कोशिश मत करना इनका डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर बैठा हुआ है।निरुपा ने मां के क‍िरदार को अमर कर दिया।

Rakhee-

फिल्म करण-अर्जुन तो याद होगी ही। 13जनवरी साल 1995 में यह फिल्म आई थी। राखी अमिताभ बच्‍चन की एक्‍ट्रेस भी बनीं और वक्त आने पर उनकी मां का किरदार भी बखूबी निभाया।  1980 और 1990 में दमदार भूमिकाएं निभाईं। फ‍िल्‍म ‘राम-लखन’  ‘बाजीगर’ ‘खलनायक’  ‘करन अर्जुन’ में इनके मां का किरदार आज भी लोगों को याद है। राखी ने अपने दौर में जबरदस्त एक्टिंग से फैन्स के दिलों में राज किया, लेकिन मां की भूमिका में इन्होंने खूब आंसू बहाए हैं। राखी ने कभी-कभी, दाग, बेमिसाल, कसमें-वादे, मुकद्दर का सिकंदर, त्रिशूल, जुर्माना, काला-पत्थर, बरसात की एक रात। कई जबरदस्त फिल्मों में काम किया है। राखी ने अपने फिल्मी करियर में तीन बार फिल्म फेयर जीत चुकी हैं।

Jaya Bachchan –  

अब बारी आती है जया बच्चन की। आंसू बहाने में इन्होंने तो हद ही पार कर दी। फिल्म कभी खुशी-कभी गम में तो इन्होंने पूरी फिल्म में बात-बात पर आंसू बहाए।  फ‍िल्‍म ‘हजार चौरासी की मां’ में जया ने ऐसी दुखी मां की भूमिका निभाई है, जिसका बेटा पश्चिम बंगाल में नक्‍सलियों के हाथों मार दिया जाता है।  जया ने फिल्म फिजा में भी मां का बखूबी रोल निभाया है।  फिल्म ‘कल हो न हो’ में भी मां की भूमिका निभाई है।

Reema Lagoo- 

रीमा ने मराठी और हिंदी फिल्मों में मां की एक अलग छाप छोड़ी। रीमा ने कयामत से कयामत तक में जूही चावला की मां और मैंने प्यार क्यों किया में सलमान खान की मां का भी किरदार निभाया था। फिल्म हम साथ-साथ हैं में भी मां के किरदार में नजर आईं।  रीमा आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्हें आज भी मां के किरदार में याद किया जाता है। रीमा लागू फिल्मों की दुनिया में सबसे फेवरेट मां कही जाती हैं। हालांकि, फिल्मों में वह हंसते मुस्कुराते हुए नजर आईं, लेकिन फिर भी किसी-किसी फिल्म में इन्होंने भी कम आंसू नहीं बहाए हैं।

Farida Jalal-

Farida Jalal  फिल्मों की दुनिया की एक ऐसी मां जिन्होंने किरदार को पूरी तरह जिया है। ये कभी भावुक नजर आईं तो कभी हंसते और मजाकिया अंदाज में। फ‍िल्‍म ‘दिल तो पागल है’, ‘कहो न…प्‍यार है’, ‘कभी खुशी-कभी गम’ ‘राजा हिंदुस्‍तानी’, ‘कुछ-कुछ होता है’ और ‘दिलवाले दुल्‍हनिया ले जाएंगे’  में इन्होंने मां का शानदार किरदार निभाया है। फिल्मों में कैसा भी सीन हो,  कुछ हो ना हो इन मांओं के आंसू कहीं न कहीं से टपक ही जाते हैं।  उन्‍हें बेस्‍ट सपोर्टिंग एक्‍ट्रेस का फ‍िल्‍म फेयर अवॉर्ड भी दिया गया।

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