SPECIAL STORY: हीरालाल यादव, भैंस चराने के दौरान शौकिया गाते-गाते ऐसे बने बिरहा सम्राट

New Delhi: ‘बिरहा’ शैली के जाने-माने भोजपुरी लोक गायक Hiralal yadav अब हमारे बीच नहीं रहे। वाराणसी में उन्होंने 12 मई की सुबह अंतिम सांस ली। वह 93 साल के थे। कई महीनों से बीमारी से जूझ रहे थे। 

Hiralal yadav  अत्यंत सरल एवं सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। उनका जाना सच में लोकगीत परम्परा के एक युग का अवसान है। हीरालाल यादव को बिरहा गायकी में महारत हासिल थी। वह भैंस चराने के दौरान शौकिया गायिका करते थे। लेकिन धीरे-धीरे उनकी गायकी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा था। लोग उनके लोकगीतों के दीवाने होने लगे थे। उन्होंने बिरहा लोकगीत को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचा दिया और खुद भी बिरहा के सम्राट बन गए।

अपनी गीतों पर लोगों को रेडिया-दूरदर्शन पर खूब झुमाया। बिरहा को विशेष विधा के तौर पर पहचान दिलाई। गायिका की वजह से उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। आज भी गांव में अक्सर हीरालाल की आवाज सुनाई देती है, लोक आज भी इनकी आवाज सुनते ही झूम उठते हैं। हीरालाल की गीतों के न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि यंग जेनरेशन भी दीवानी हैं।

बिरहा सम्राट हीरालाल यादव

हीरालाल यादव के राजकुमारी बनी बंदरिया, शंकर जी की लीला, आजमगढ़ कांड, सुई के छेदा में हाथी जैसे तमाम लोकप्रिय बिरहा गीत हैं। जिनको आज भी खूब सुना जाता है। हीरालाल लोगों के बीच इतने अधिक प्रसिद्द हो गए कि उन्हें इस साल देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्मश्री सम्मान मिला।

साल 2015 में उन्हें यश भारती पुरस्कार से भी नवाजा गया है। हीरालाल की बदौलत ही 70 साल में पहली बार बिरहा को सम्मान दिया गया।वाराणसी जिले में सरायगोवर्धन में जन्में हीरालाल के निधन पर पूरा देश शोक में डूबा है। वह बेहद गरीब थे लेकिन गाना गाने के शौक ने उन्हें पद्मश्री सम्मान तक पहुंचा दिया। पीएम मोदी ने दो दिन पहले ही उन्हें फोन करके उनका हालचाल लिया था। दो बाद हीरालाल के निधन की खबर सुनकर पीएम मोदी ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया है।

 

 

 

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