SPECIAL STORY: ऐन जार्विस, वह मां जिनके लिए दुनिया में पहली बार मदर्स डे मनाया गया

New Delhi: 9 मई, 1914 को अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति थॉमस वुडरो विल्सन ने एक सिग्नेचर किया। एक सिग्नेचर ने ऐन जार्विस के सपने पूरे कर दिए। सपना था- कोई ऐसा दिन जिसमें माओं के समर्पण को याद किया जाए। पहचान मदर्स डे के रूप में बनी। 1914 को मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे के तौर पर मनाने की घोषणा की गई।

ऐन जार्विस… वह मां जिनके लिए दुनिया में पहली बार मदर्स डे बनाया गया। ऐन जार्विस की बेटी ऐना जार्विस ने मांओं की पहचान दिलाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। ऐना जार्विस ने इसकी प्रेरणा अपनी मां से ही ली। ऐन जार्विस की मां ने ही सबसे पहले मदर्स डे वर्क क्लब्स की शुरुआत की थी।

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ऐन सोशल एक्टिविस्ट थीं। वह मदर्स डे क्ल्ब का आयोजन करती थीं। इस आयोजन में ज्यादा से ज्यादा माओं को शामिल होने के लिए जागरुक किया जाता था। इसमें शामिल मांओं की परेशानी, उनके बच्चों की परेशानी सुनी जाती थी।

एक दिन ऐन प्रार्थना कर रहीं थीं कि, मां के समर्पण और त्याग को व्यक्त करने का कोई तो दिन हो। मां की ये प्रार्थना बेटी ऐना ने सुन ली। मां के निधन के बाद उनके सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी ऐन मेरी ने उठा ली। 365 दिन में एक दिन मां का भी हो इसके लिए ऐना ने सारी जिंदगी लगा दी। उन्होंने मां के सपने पूरे करने की कसम खाई। और मदर्स डे की स्थापना करके ही मानी।

ऐन की बेटी ऐना ने मां के कामों को आगे बढ़ाते हुए 1908 में वेस्ट वर्जिनिया में पहली बार मदर्स डे मनाया। तब से यह दुनियाभर में मई के दूसरे रविवार मनाया जाने लगा। मदर्स डे की शुरुआत बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए 105 साल पहले की गई। 24 नवंबर, 1948 को ऐना की मृत्यु हो गई।  उन्हें पेंसिल्वेनिया के बाला साइनेड में फिलाडेल्फिया के पास वेस्ट लॉरेल हिल कब्रिस्तान में उनकी मां, बहन और भाई के बगल में दफना दिया गया।

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