SPECIAL STORY: पहले भारतीय फिल्ममेकर,जिन्हें पुतिन ने ऊंचा सम्मान ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप पहनाया था

New Delhi: Mrinal Sen की आज जयंती है। 14 मई 1923 को जन्में मृणाल सेन वो फिल्ममेकर थे, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को सरहद पार पहुंचाया। उनकी फिल्मों ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम कमाया।  ये सम्मान पाने वाले वह अकेले फिल्मकार थे। 

मृणाल सेन ऐसे भारतीय फिल्ममेकर थे, जिनका पहला प्यार सिनेमा नहीं बल्कि साहित्य था। नील आकाशेर नीचे’’, ‘‘भुवन शोम’’, ‘‘एक दिन अचानक’’, ‘‘पदातिक’’ और ‘‘मृगया’’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले सेन देश के सबसे प्रख्यात फिल्म निर्माताओं में से एक समानांतर सिनेमा के जनक थे।

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मृणाल सेन

14 मई 1923 को बंगाल में जन्में मृणाल सेन का समाज की सच्चाई का कलात्मक चित्रण करने के लिए जाना जाता था। मृणाल सेन ने अधिकांश फिल्में बांग्ला भाषा में की। 1955 में मृणाल सेन की पहली फिल्म आई थी। फिल्म का नाम रात भोर था। ये फिल्म बंगाल के सुपरस्टार उत्तम कुमार की पहली फिल्म थी। इस फिल्म के लिए मृणाल को नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

साल 2005 में भारत सरकार ने मृणाल सेन को पद्म विभूषण और उसी साल दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया। साल 2000 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपने देश का ऊंचा सम्मान ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप पहनाया था। ये सम्मान पाने वाले वो अकेले भारतीय फिल्ममेकर हैं। मृणाल सेन एक ऐसे भारतीय फिल्ममेकर हैं जिनकी फिल्मों में एक अलग ही बात होती थी। मृणाल सेन ऐसे फिल्ममेकर थे, जो आपनी फिल्मों में कुछ अलग सोच शामिल करते थे। उन्हें एक्सपेरिमेंट करना पसंद था। मृणाल सेन कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाते थे। साल 1983 में मृणाल की फिल्म खारिज को स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला था।

मृणाल सेन हाईस्कूल की परीक्षा पास करने बाद शहर छोड़ दिया और कोलकाता में पढ़ने के लिये आ गये। वह भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी थे और उन्होंने अपनी शिक्षा स्कोटिश चर्च कॉलेज एवं कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पूरी की। अपने विद्यार्थी जीवन में ही वे वह कम्युनिस्ट पार्टी के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ गये। वे कभी इस पार्टी के सदस्य नहीं रहे पर इप्टा से जुड़े होने के कारण वे अनेक समान विचारों वाले सांस्कृतिक रुचि के लोगों के परिचय में आ गए। उन्हें अक्सर वैश्विक मंच पर बंगाली समानांतर सिनेमा के सबसे बड़े राजदूतों में से एक माना जाता है।

मृणाल जो भी फिल्में बनाते वह राजनीति से प्रेरित थीं, जिसके कारण वे मार्क्सवादी कलाकार के रूप में जाने गए। पूरे भारत में राजनीतिक उतार चढ़ाव का समय था। विशेषकर कलकत्ता और उसके आसपास के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित थे, जिसने नक्सलवादी विचारधारा को जन्म दिया। उस समय लगातार कई ऐसी फिल्में आयीं जिसमें उन्होंने मध्यमवर्गीय समाज में पनपते असंतोष को आवाज दी। यह निर्विवाद रूप से उनका सबसे रचनात्मक समय था। 30 दिसम्बर 2018 को मृणाल सेन का उनके कोलकता में 94 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया।  वह लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।

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